ग्रामीण इलाकों में अब कैंसर की स्क्रीनिंग करेंगी आशा, दिया गया प्रशिक्षण

ग्रामीण इलाकों में अब कैंसर की स्क्रीनिंग करेंगी आशा, दिया गया प्रशिक्षण…

रानीगंज रेफरल अस्पताल में आशा कर्मियों को कैंसर स्क्रीनिंग का दिया गया प्रशिक्षण।

रानीगंज। जिले में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एहतियात के तौर पर विशेष पहल की जा रही है। आम लोगों को रोग के संभावित खतरों के प्रति जागरूक करते हुए शुरुआती दौर में ही इसका पता लगाकर संपूर्ण इलाज सुनिश्चित कराने की कोशिशें की जा रही हैं।

इस क्रम में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी आशा कार्यकर्ताओं को कैंसर की पहचान व इससे बचाव संबंधी उपायों को लेकर खासतौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस तरह का विशेष प्रशिक्षण गुरुवार को रेफरल अस्पताल रानीगंज में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोहित कुमार झा की अगुआई में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर मुजफ्फरपुर के चिकित्सकों द्वारा आशा कर्मियों को कैंसर की स्क्रीनिंग सहित रोग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।

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महिलाओं में ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक –

प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर के लक्षण व पहचान के संबंध में आशा कर्मियों को विस्तृत जानकारी दी गई। होमी भाभा कैंसर अस्पताल की चिकित्सक डॉ साइना ने उन्हें रोग से जुड़े विभिन्न लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिलाओं में जहां ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक मिलते हैं।

वहीं बड़ी तेजी से पुरूष मुंह के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्तन में गांठ पड़ना, दर्द, खुजली, त्वचा का रंग नारंगी होना, स्तन के त्वचा पर गड्ढे पड़ना स्तन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। वहीं सर्वाइकल कैंसर का मामला 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक मिलता है। स्क्रीनिंग के जरिये इसका पता लगाना आसान होता है। रोग के गंभीर होने से पहले इसका पूर्ण इलाज संभव है।

सामान्य लक्षण होने पर भी जांच को दें प्राथमिकता-

मुंह के कैंसर के लक्षणों की जानकारी देते हुए आशा कर्मियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के मुंह या जीभ की परत पर धब्बे होना, मुंह में छाले व सफेद व लाल दाग, मसूड़ों का मोटा होना, दांतों का ढीला होना, मुंह से खून बहना, कान में दर्द, जबड़े में सूजन, गले में खराश, मुंह खोलने में कठिनाई व चबाने या निगलने में दिक्कत जैसी समस्या शामिल है।

रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ रोहित कुमार झा ने कहा कि किसी व्यक्ति में इसमें से कोई लक्षण होने का कदापि ये मतलब नहीं है कि उन्हें मुंह का कैंसर है। लेकिन ऐसे मरीजों को जांच के लिये प्रेरित किया जाना जरूरी है।

संभावित मरीजों की खोज में आशा की भूमिका महत्वपूर्ण-

रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रोहित कुमार झा ने बताया कि कैंसर किसी भी आयु वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। शुरुआती लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाया जा सकता है। कैंसर का पता जितनी जल्दी चलता इसके पूर्ण इलाज की संभावना उतनी अधिक होती है।

ग्रामीण इलाकों में कैंसर के संभावित मरीजों का पता लगने में आशा कर्मी की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्होंने क्षेत्र भ्रमण के दौरान आशा कर्मियों को रोग से जुड़े किसी लक्षण वाले व्यक्ति को चिह्नित कर उन्हें जरूरी जांच व इलाज के लिये प्रेरित करने के लिये प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में बीएचएम प्रेरणा रानी वर्मा, बीसीएम डोली सिंह सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

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