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दरभंगाबिहार

मणिकांत झा की मैथिली मे लिखी ‘आरतीमणि’ का विमोचन

मणिकांत झा की मैथिली मे लिखी ‘आरतीमणि’ का विमोचन

राजगोपाल हेल्थ केयर सेंटर में रविवार को आयोजित विमोचन समारोह में मैथिली मंच के कलाकारों ने भक्तिपूर्ण रचनाओं पर दी संगीतमय प्रस्तुति।

इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि भगवान की पूजा से मन को शांति और आत्मा को तृप्ति मिलती है। लेकिन पूजा के दौरान ईश्वर की अराधना तब तक पूर्ण नहीं होती, जब तक भगवान की आरती नही की जाय। इस हिसाब से दीपावली की पूर्व संध्या पर विभिन्न देवी देवताओं के आरती संग्रह आरतीमणि का प्रकाशन मैथिली भक्ति साहित्य के लिए महत्वपूर्ण है।

यह बात विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने रविवार को मणिश्रृंखला अंतर्गत मैथिली में रचित आरतीमणि का विमोचन करते हुए कही। महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित आरती संग्रह का लोकार्पण विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू,

दरभंगा के पूर्व महापौर ओमप्रकाश खेड़िया, आईएमए के अध्यक्ष डा सुशील कुमार, एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा अनिल कुमार झा, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डा ओमप्रकाश, मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा, डा एडीएन सिंह, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी विवेकानंद झा, कलिगांव के मुखिया महेश कुमार झा, डा मधु आदि के कर-कमलों से साथ मिलकर किया गया।

मौके पर डा ओमप्रकाश ने कहा कि शुद्ध मन और श्रद्धा से की गई आरती अत्यंत कल्याणकारी होती है। कारण आरती के दौरान गाई जाने वाली स्तुति मन और वातावरण को शुद्ध और पवित्र कर देती है। अपने संबोधन में उन्होंने आरती के वैज्ञानिक महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। डा एडीएन सिंह ने प्रतिदिन प्रात:काल सुर-ताल के साथ आरती करने को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक बताया।

ओमप्रकाश खेड़िया ने उम्मीद जताई कि मणिकांत की रचना श्रीकृष्णमणि भी मिथिला के हर घर में जगह बनाने में कारगर होगी। एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा अनिल कुमार झा ने कहा कि मिथिला के भक्तों के लिए मणिकांत झा का यह रचना पुष्प अनुपम उपहार है।

मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि सत्य, न्याय और भक्ति के विजय पर्व के प्रतीक दीपावली की पूर्व संध्या पर आरती मणि के विमोचन को सुखद बताया।

अपने संबोधन में महेश कुमार झा ने मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा द्वारा मैथिली में रचित आरतीमणि को मिथिला में भगवत भक्ति की पुरातन संस्कृति का संवाहक बताया। प्रो रमेश झा ने मणिकांत झा के आरती संग्रह को मैथिली भक्ति साहित्य जगत को मजबूती प्रदान करने वाला बताया।

महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन एवं मणिशृंखला के प्रकाशक हीरा कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी ना था कि मणिशृंखला अंतर्गत प्रकाशित पुस्तकों की कड़ी इतनी जल्दी 35वें रचना पुष्प को प्राप्त कर लेगी। उन्होंने मणिशृंखला की सफलता के लिए आम मैथिल जन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।

मणिकांत झा के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में आरतीमणि पुस्तक से अनेक भक्तिमय प्रस्तुतियां दी गई । कार्यक्रम में आकाशवाणी दरभंगा की कलाकार डा सुषमा झा, दीपक कुमार झा, डा ममता ठाकुर, डा प्रतिभा स्मृति, वीणा झा, ललित कुमार झा एवं जया ने महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित भक्तिमय आरती संग्रह से गीतों की एक से बढ़कर एक संगीतमय प्रस्तुतियां दी। वहीं, तबला पर गौरीकांत झा और इलेक्ट्रॉनिक कैसियो पर गोलू राजा ने मनोहर संगति दी।

कार्यक्रम में विष्णु कुमार झा, डा अशोक कुमार झा, प्रो अमरकांत कुमर, विनोद कुमार, विनोद कुमार झा, दुर्गा नन्द झा, प्रवीण कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई, नीलम झा, पूनम झा, कंचना झा, वंदना झा, संतोष कुमार झा, नवल किशोर झा, गंधर्व कुमार झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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